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महेंद्र सिंह धोनी को खेल रत्न
मुंबई।
क्रिकेट
के प्रशंसकों को सदैव अपनी ओर आकर्षित करने वाले भारतीय
क्रिकेट टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को
राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान मिलेगा। धोनी एक आदर्श युवा और
युवाओं में सहज प्रेरणा के स्रोत के रूप में देखे जाते हैं।
विज्ञापन हो या खेल का मैदान या फिल्मी शौक सब जगह धोनी शालीन
ही दिखते हैं। खिलाड़ी के रूप में धोनी को कभी तनाव में नहीं
देखा गया। लड़कियों और बच्चों में लोकप्रिय एवं महिला कमांडो
से घिरे हुए धोनी के चाहने वालों में बड़ी-बड़ी हस्तियां हैं।
मसलन- पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ उनके चाहने
वालों में एक हैं। वनडे में भारी सफलता और टेस्ट मैच में भी
कामयाबी धोनी के नाम दर्ज है। टेस्ट मैच में भी उन्हें सफलता
हाथ लग रही है। उन्होंने आस्ट्रेलिया को आस्ट्रेलिया में
हराया। आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी के रूप में जाने जाते
हैं। लेकिन जादू-टोना में उनका विश्वास और उसका सार्वजनिक
प्रदर्शन धोनी के प्रशंसकों ने अच्छाईयों के रूप में नहीं
लिया।
क्रिकेट में धोनी उन भाग्यशालियों में एक हैं जिनका
किस्मत बहुत साथ देती है। हिटलर ने कहा था कि मुझे शक्तिशाली
जनरल नहीं बल्कि भाग्यशाली जनरल चाहिए। सिद्धांत वही है। बात
यहां भी है कि यदि किस्मत साथ है तो दुनिया मुट्ठी में और
किस्मत ने साथ छोड़ा तो मुट्ठी भी अपनी नहीं। उत्तराखंड के
पहाड़ों पर जन्मे झारखंड से जाने गए धोनी को क्रिकेट में सफलता
का अनुपात उसे सचिन से आगे ले जाता दिखाई देता है। प्रसिद्धि
का रिकार्ड सचिन के नाम है। किस्मत में धोनी से बहुत आगे हैं
जबकि सचिन की किसी मैच में मौजूदगी टीम को मनोवैज्ञानिक
ग्लूकोज देती है।
रांची के लोग धोनी को बहुत प्यार करते हैं। खेल रत्न की
घोषणा की खबर सुनकर धोनी के स्कूल के बच्चों में खुशी छा गई।
खूब आतिशबाजी हुई। देवी के दर्शन करके कही जाने वाले धोनी
टोटकों में ज्यादा रहते हैं। धोनी गाना भी गाते हैं। अमिताभ
बच्चन के फैन हैं। फिल्म लावारिस के गाने बड़े पसंद करते हैं।
एक कार्यक्रम में धोनी स्टेज पर कह रहे थे कि मै अमिताभ बच्चन
का फैन हूं और उनकी फिल्म लावारिस का गाना मुझे बहुत पसंद है।
मै गाना गाऊंगा लेकिन मुझे नहीं लगता कि म्यूजिक मेरे साथ चल
पाएगा तो भोजपुरी गायक और मंच संचालक मनोज तिवारी ने तुरंत लपक
लिया कि आज आप गाइए और सारा हिंदुस्तान म्यूजिक बजाएगा। गाना
था-‘सलाम-ए-इश्क मेरी जां जरा कुबूल कर लो।’
धोनी की प्रहारक क्षमता में एक साथ कई रिफलेक्शन चलते
हैं। कला-दृढ़ता-उत्साह-लक्ष्य और परिणाम। तनाव धोनी के शब्द
कोष में नहीं दिखाई देता है। यही एक खिलाड़ी की सफलता का प्रथम
एवं शक्तिशाली गुण माना जाता है। वह आऊट होकर आने वाले कुछ
अन्य खिलाडि़यों की तरह जमीन पर बल्ला ठोंककर नहीं लौटता है और
खेल को खेल की तरह से लेता है। वह ग्राउंड पर खड़े होकर भौंडे
तरीके से अपील नहीं करता है और न पाकिस्तानियों की तरह से या
श्रीसंत जैसे खिलाडि़यों की तरह से चिल्लाता है। किसी क्रिकेटर
का यह भी एक परम गुण है कि वह मैदान में किस प्रकार का व्यवहार
करता है। वह उस समय अपने जिला प्रांत देश का प्रतिनिधित्व कर
रहा होता है जहां
पूरी दुनिया की उसकी हर गतिविधि पर नजर होती है।
लेकिन देखा गया है कि अधिकांश खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय
मैदानों पर भी गली मुहल्लों की तरह खेलते और अनाप-शनाप बकते
हैं। क्रिकेट में खेलने की योग्यताओं में यह भी शामिल होना
चाहिए कि खिलाड़ी का सामान्य व्यवहार कैसा है। वह अपने प्रांत
एवं देश की भाषा-सभ्यता और शालीनता संस्कृति एवं संस्कारों का
नायक भी होता है केवल खिलाड़ी ही नहीं। अधिक नहीं लेकिन धोनी
एवं सचिन जैसे खिलाडि़यों ने इस तरफ ध्यान देकर भी क्रिकेट
खेला है जो अच्छी बात है। हर खिलाड़ी अगर संत और भज्जी की तरह
करने लग जाएंगे या पाकिस्तानी खिलाडि़यों की तरह चिल्लाने लग
जाएंगे तो फिर उनका खेल खेल नहीं रहेगा। यह खेल है कोई युद्ध
नहीं है और न ही गाली गलौज की कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता।
खेलिए और अपने देश की महान परंपराओं को भी दुनिया को दिखाईए।
खेल रत्न पुरस्कार के लिए बधाई।
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