भोपाल के बाद अब इंदौर में आईटी पार्क

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भोपाल। मध्य प्रदेश में आईटी पार्क के क्षेत्र में निजी कंपनियों ने दिलचस्पी ली है और इस पर यहां बहुत तेजी से काम हो रहा है। राज्य में निजी क्षेत्र की दिलचस्पी को देखते हुए सरकार ने भोपाल की तरह इंदौर में भी आईटी पार्क के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। भोपाल में आईटी पार्क का काम यूनीटेक को दिया जा चुका है। रियल एस्टेट कंपनी यूनीटेक ने 61.10 करोड़ रुपये में भोपाल आईटी पार्क सौदे को हासिल किया। कंपनी से इससे पहले 44.15 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी हालांकि बाद में उसे रद्द कर दिया गया। बोली के लिए केवल दो कंपनियों की छंटनी की गई थी।
यूनीटेक के अलावा के रहेजा ने बोली में हिस्सा लिया और 48.51 करोड़ रुपये की बोली लगाई। एक अन्य रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ ने पहली बोली पेशकश के दौरान 41.49 करोड़ रुपये कोट किए थे। भोपाल आईटी पार्क 212 एकड़ क्षेत्रफल पर फैला होगा। पार्क को हाल में विशेष आर्थिक क्षेत्र का दर्जा भी मिल गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने कंपनी की पेशकश को मंजूरी दे दी है। कंपनी को सभी फेसीलिटीज में 2 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र का विकास करना होगा। इसके अलावा राज्य सरकार जल्द ही जबलपुर और ग्वालियर आईटी पार्क के लिए बोली आमंत्रित करेगी। ये पार्क क्रमशः 90 एकड़ और 28.65 एकड़ जमीन पर तैयार किए जाएंगे। इन पार्कों को भी सेज का दर्जा मिल चुका है। इनके लिए कुछ गैर रियल एस्टेट कंपनियों ने भी अपनी इच्छा जताई है।
भोपाल आईटी पार्क की कीमत 3,000 रुपये प्रति वर्ग फीट है और 180 एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। इस जमीन की कीमत 218.53 करोड़ रुपये है। पार्क में करीब 10 आईटी कंपनियों को कारोबार शुरू करने की इच्छा जताई है। राज्य के वाणिज्य और उद्योग मंत्री जयंत मलैय्या ने बताया कि ‘हमने इंदौर आईटी पार्क के लिए भी ईओआई मांगे हैं।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पार्क के लिए निवेशकों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिलेगी।

टोयोटा की भी दो छोटी कारे
चेन्नई। टोयोटा भी भारत में छोटी कारें ला रही है। इसके लिए कंपनी लगभग 1400 करोड़ रुपये खर्च कर नया संयंत्र लगाएगी। भारतीय ऑटो बाजार में छोटी कारों के बाजार को भुनाने के लिए टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की जल्द ही दो छोटी कारों के निर्माण की योजना है। अभी तक यह कंपनी भारत में प्रीमियम श्रेणी की कारें ही बेचती थी। पहले कंपनी की योजना ज्यादा मॉडल बाजार में उतारने की थी, लेकिन अब वह दो मॉडल के साथ ही इस बाजार में आना चाहती है।
किर्लोस्कर मोटर के इन दोनों मॉडलों में से एक 1.1 लीटर और दूसरा 1.3 लीटर इंजन की क्षमता वाला होगा। नए मॉडल डीजल और पेट्रोल दोनों ही होंगे। कंपनी की योजना पहले 1.3 लीटर डीजल की क्षमता वाली सिदान पेश करेगी। दावा है कि कंपनी का यह मॉडल फोर्ड फिएस्टा को टक्कर देगा।
किर्लोस्कर के अनुसार इस कार की कीमत 4.5 लाख रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है। इस श्रेणी में अभी मारूति की स्विफ्ट का ही दबदबा है। स्विफ्ट की एक्स-शोरूम कीमत 4-5 लाख के बीच है। कपंनी के इन मॉडलों को बाजार में आने में लगभग दो साल लग सकते हैं। कंपनी की योजना ‘फॉर्च्यूनर’ नाम से स्पोर्टस युटिलिटी व्हीकल लांच करने की है। इसकी कीमत 16-20 लाख रुपये के बीच होने की उम्मीद है। हालांकि अभी कंपनी इस बात पर विचार ही कर रही है कि इस कार को असेंबल्ड ही आयात किया जाए या फिर इसके पुर्जों को मंगाकर भारत में असेंबल किया जाए।
ऑटो विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में फॉर्च्यूनर के टॉप मॉडल की कीमत 15-16 लाख के बीच में ही रहेगी। कार को कंपनी अगले साल जून-सितंबर के बीच कभी भी लांच कर सकती है।
कंपनी के प्रवक्ता ने इसकी पक्की जानकारी नहीं दी। क्योंकि यह उसके कारोबार से जुड़ा बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है।
कंपनी की फॉर्च्यूनर एसयूवी आईएमवी प्लेटफार्म पर आधारित है। भारत में कंपनी की सबसे पसंदीदा कार इन्नोवा भी इसी प्लेटफार्म पर विकसित की गई थी। फॉर्च्यूनर पहले ही फिलिपींस, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में काफी पसंद की जा रही है। कंपनी ने अभी इस मॉडल को तीन संस्करणों में ही उतारा है। कंपनी की बेंगलूर स्थित संयंत्र में प्रीमियम कार कोरोला का डीजल संस्करण भी जल्द ही लांच करने की योजना है। इस संयंत्र की क्षमता 63,000 कार सालाना बनाने की है।
कंपनी इसके पास ही 1400 करोड़ रुपये की लागते से सालाना 1 लाख वाहन की क्षमता वाला नया संयंत्र भी लगाएगी। यह संयंत्र साल 2010 में कार्य करना शुरू करेगा। कंपनी की दोनों नई कारों का निर्माण इसी संयंत्र में किया जाएगा।
टीकेएम जापानी कंपनी टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन (टीएमसी) और पुणे की कंपनी किर्लोस्कर का साझा उपक्रम है। इस उपक्रम में टीएमसी के 89 फीसदी शयर हैं और भारतीय समूह की 11 फीसदी हिस्सेदारी है।


झींगा ‌निर्यातकों के ‌‌दिन फिरे‌

कोच्चि। भारतीय मुद्रा की मजबूती से भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के सी-फूड निर्यातकों को अमरीका के लिए निर्यात में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अमरीका के वाणिज्य विभाग की ओर से गर्म पानी वाली झींगा मछली पर एंटी डंपिंग ड्यूटी में कटौती किए जाने की घोषणा से सी-फूड निर्यातकों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पिछले म‌हीनों समुद्री उत्पादों के निर्यातकों को दो मोर्चो पर सफलता हाथ लगी, जब विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने लगातार बांड की जरूरतों के मुद्दे पर भारतीय निर्यातकों के पक्ष में निर्णय सुनाया। उधर, अमरीका के वाणिज्य विभाग की ओर से एंटी डंपिंग ड्यूटी में कटौती कर 7.22 फीसदी से 1.09 फीसदी कर दी गई। उल्लेखनीय है कि यह कटौती दूसरी प्रशासकीय समीक्षा के बाद झींगा मछली के निर्यात पर की गई है। इसके साथ ही वाणिज्य विभाग की ओर से डेवी सी-फूड उत्पादों 0.70 फीसदी और फाल्कन सी-फूड उत्पादों पर 1.69 फीसदी कर की घोषणा की गई है।
दूसरी प्रशासकीय समीक्षा पर काम एक साल पहले शुरू किया गया था और इसमें 313 भारतीय निर्यातकों को सूचीबद्ध किया गया था। इसके साथ ही वाणिज्य विभाग की ओर से तैयार की गई प्रश्नावली का जवाब कुल 71 कंपनियों ने भेजा गया था। हालांकि बहुत से निर्यातकों को इस समीक्षा से बाहर रखा गया, क्योंकि उन्होंने अमरीका में निर्यात को बंद कर दिया था। उन्हें 10.17 फीसदी की दर से कर देना होगा। इसके अलावा, 127 निर्यातकों, जिन्होंने समीक्षा का जवाब नहीं भेजा, उन्हें अमरीका में निर्यात करने पर 110.90 फीसदी का प्रतिकूल तथ्य उपलब्धता (एएएफ) शुल्क लगेगा।
इसी बीच विश्व व्यापार संगठन ने भारत के हित में फैसला सुनाया है कि अमरीका में झींगा मछली के आयात के लिए 100 फीसदी लगातार बांड की जरूरत होगी। इससे पहले इसी मुद्दे पर कोर्ट ने इक्वाडोर और थाईलैंड के पक्ष में फैसला सुनाया गया  था। एंटी डंपिंग ड्यूटी और कस्टम बांड की जरूरत ने अमरीका में निर्यात करने में लगे भारतीय निर्यातकों को खासा प्रभावित किया है। वर्ष 2007-08 में अप्रैल-दिसंबर के दौरान भारतीय समुद्री उत्पादों के निर्यात में खासी गिरावट दर्ज की गई और 93,956 टन तक पहुंच गया।


भारत के निर्यात में बढ़ोत्‍तरी से बाज़ार खुश

नई दिल्ली। भारत के निर्यात में जनवरी 2008 में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 20.47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। रुपये के हिसाब से भारतीय निर्यात में 7.66 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जनवरी 2008 में कुल निर्यात 10.9 डॉलर से बढ़कर 13.14 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि आयात 63.57 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ 22.50 अरब डॉलर का हुआ।
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल जनवरी में कुल 124.19 अरब डॉलर का कुल निर्यात हुआ। अभी चालू वर्ष की गणना में दो महीने बाकी हैं और इस अवधि में 35.81 अरब डॉलर का निर्यात करने पर निर्यात लक्ष्य 160 अरब डॉलर को छू पाना संभव हो पाएगा। सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 150 से 155 डॉलर के निर्यात लक्ष्य को पाने में सफल होने का दावा किया है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार अप्रैल जनवरी 2007-2008 में कुल आयात 191.6 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 29.63 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल कुल आयात 147.81 अरब डॉलर का था। व्यापार घाटा इस अवधि में 67.4 अरब डॉलर का रहा, जो पिछले साल 45.7 अरब डॉलर का था। इस तरह इस घाटे में बढ़ोतरी हुई।
इस साल रुपये की मजबूती के कारण व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात पर थोड़ा दबाव बना रहा। यही वजह रही कि यह 160 अरब डॉलर के लक्ष्य को नहीं पा सका। लेकिन अप्रैल-दिसंबर 2007-2008 के बीच इसमें 21.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वित्तीय वर्ष में रुपया अमरीका, ब्रिटेन, जापान, चीन और हांगकांग की मुद्राओं की तुलना में अपनी मजबूती बनाए रखा। 3 अप्रैल 2007 से 16 जनवरी 2008 के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 9.8 प्रतिशत मजबूत हुआ।
जनवरी 2008 में तेल का आयात 7.7 अरब डॉलर का रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 60.8 प्रतिशत अधिक था। पिछले साल यह 4.8 अरब डॉलर का था। चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल-जनवरी में तेल का कुल आयात 48.9 अरब डॉलर का रहा, जो पिछले साल के 48.9 अरब डॉलर के मुकाबले 16.49 प्रतिशत अधिक रहा। गैर तेल उत्पाद के आयात में 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पिछले साल के 8.96 अरब डॉलर के मुकाबले इस साल यह 14.7 अरब डॉलर का रहा।