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बस्ती से जारी राम की सीडी का बसपा से कैसा संबंध?
बस्ती, उत्तर प्रदेश।
बस्ती जिले से चली बताई गई राम, लक्ष्मण सीता, रावण, महाभारत
और सवर्ण जातियों के खिलाफ सीडी ने देश भर में सनसनी तो फैला
दी है लेकिन इस सीडी का बहुजन समाज पार्टी या उत्तर प्रदेश की
मुख्यमंत्री मायावती से कोई सीधा संबंध प्रकट नहीं होता है
जबकि खोजी पत्रकारिता का दावा करने वाले देश के एक टीवी न्यूज
चैनल ने इस सीडी में मायावती और बसपा को घसीटने में कोई कसर
नहीं छोड़ी है। लगता ही नहीं है कि यह सीडी हाल ही में बनवाकर
जारी की गई है। ऐसा लगता है कि यह सीडी किसी और समय की है जिसे
अब बसपाइयों से जोड़कर प्रसारित किया गया है। मायावती इस सीडी
से किसी भी प्रकार से मतलब से इन्कार कर चुकीं हैं।
बसपाई विचारधारा के अधिकांश लोगों और मायावती का रामायण के इन
पात्रों और सवर्ण समाज के खिलाफ नफरत पैदा करने और इनका अपमान
करने का इतिहास तो जरूर रहा है लेकिन मायावती और बसपा आज भी
इसी इतिहास को सार्वजनिक रूप से दोहरा रहे हों इस पर यकीन करना
लोगों को फिलहाल मुश्किल हो रहा है। कोई भी सत्तारूढ़ दल ऐसी
सीडी बनवाकर अपने ही राज्य में क्यों चलने देगा या बिकने देगा
या बनवाने देगा? इसकी संभावना कम ही नजर आती है। इसीलिए
मायावती ने ताल ठोककर कहा है कि इस सीडी का न तो बसपा से कोई
मतलब है और न उनसे कोई वास्ता है। यह मामला उत्तर प्रदेश
विधानसभा में जोर शोर से उठाया गया था जिसमें सदस्यों ने भारी
शोरगुल किया था। क्योंकि इस सीडी में ब्राहम्णों और ठाकुरों को
अत्याचारी कहा गया है और सवर्णों को भद्दी गालियां दी गई हैं।
आरोप लगया गया कि यह सीडी बसपा सांसद की देखरेख में तैयार की
गई।
समाचार चैनल ने बस्ती से बसपा के सांसद लालमणि प्रसाद की इस
सीडी के निर्माण में संलिप्तता की बात कही है और सांसद का
संक्षिप्त साक्षात्कार भी प्रसारित किया गया जिसमें संवाददाता
के सवालों और सांसद के उत्तरों से प्रकट होता है कि संवाददाता
सांसद से यह कहलवाने की कोशिश कर रहा है कि सांसद यह बात कह
दें कि उनका इस सीडी से कोई संबंध है। सांसद बस्ती की संस्था
अखिल भारतीय बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर समाज सुधार समिति के
सदस्य जरूर हैं। तीसरी आज़ादी नाम की इस सीडी को इस संस्था के
कुछ पदाधिकारी जारी करते हुए दिखाए गए हैं लेकिन सांसद ने भी
यह कहीं नहीं कहा है कि वह इस सीडी का कोई समर्थन करते हैं या
उनकी इसके निर्माण में कोई भूमिका है। सांसद के जवाब से जाहिर
होता है कि वह इस मामले में दोषी नहीं लगते बल्कि वह स्पष्ट कह
रहे हैं कि देश और प्रदेश में सामाजिक सद्भाव का माहौल नहीं
बिगड़ना चाहिए। वह यह भी कह रहें हैं कि उन्हें किसी ऐसी सीडी
की कोई जानकारी नहीं है। इस मामले में बस्ती पुलिस ने समिति के
कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया है।
इस चैनल ने बस्ती के जिलाधिकारी से भी बार-बार पूछा है कि उनको
इस सीडी के बारे में क्या कहना है क्योंकि वह उनके ही जिले से
जारी हुई है। जिलाधिकारी बस्ती शुरू से ही कह रहे हैं कि
उन्हें यही मालूम नहीं है कि इस प्रकार की कोई सीडी बस्ती में
बनी है या ऐसा कोई फिल्मांकन हुआ है। डीएम कह रहे हैं कि यदि
चैनल के पास इस तरह की कोई जानकारी है तो वह उन्हें उपलब्ध
कराएं, वह उसकी जांच कराएंगे। जिलाधिकारी का जवाब बिल्कुल
स्पष्ट है यदि जिलाधिकारी के जवाब में कोई घालमेल होता तो वह
तुरंत पकड़ में आ जाता। जिलाधिकारी के साफ तौर से उत्तर देने
में कोई हड़बड़ाहट या कोई चूक जरूर हो गई होती या उनके इस
मामले से बचने के प्रयास का एहसास होता। जिन्होंने ने भी
जिलाधिकारी बस्ती का जवाब सुना होगा उन्होंने भी यही महसूस
किया होगा। कुल मिलाकर इस सीडी से लगता है कि यह कोई बहुत
पुरानी सीडी है जिसे सनसनीखेज बनाकर मायावती और बसपा से जोड़कर
प्रसारित किया गया है।
प्रश्न है कि यह सीडी जिसमें कि रामायण के पात्रों के बारे में
बहुत आपत्तिजनक ढंग से फिल्मांकन किया गया है और उनके रिश्तों
को कलंकित किया गया है, यदि बसपा के लोगों ने बनवाई है तो वह
इसी समय क्यों दिखाई जा रही है इसका प्रदर्शन चुनाव के दौरान
क्यों नहीं हुआ? क्योंकि उसमें सभी बातें इस संदेश को प्रसारित
करती हैं कि सारे दलित एकजुट हो जाएं जिसकी कि बसपा को बहुत
जरूरत है। वैसे भी प्रदेश में सच्ची रामायण नाम की किताब बिकती
और बंटती आ रही है। मुख्यमंत्री मायावती ने इस सीडी का संज्ञान
लेते हुए इसकी जांच के आदेश दिए हैं। मायावती और बसपा से
नाइत्तफाकी रखने वाले दलितों का इससे संबंध हो सकता है जो कि
दूसरे दलितों को यह बताना चाह रहे हो कि मायावती आज जिस सवर्ण
समाज के पीछे दौड़ रही है वह उससे अलग हो जाए। सीडी की जांच
में जो भी निष्कर्ष सामने आए लेकिन यह सत्य है कि यह सारे बीज
भी बसपा और मायावती के ही बोए हुए हैं जिनके अच्छे फल भी
उन्हें मिलेंगे और उसके बुरे परिणाम भी भुगतने होंगे।

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